नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शुक्रवार को पूर्व छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को कथित शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार कर लिया है। यह जानकारी आधिकारिक सूत्रों ने दी।
धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत उनकी गिरफ्तारी तब हुई, जब दुर्ग जिले के भिलाई नगर में उनके घर पर ईडी ने ताजा छापेमारी की। भूपेश बघेल और उनके बेटे चैतन्य बघेल दोनों एक ही स्थान पर रहते हैं।
सूत्रों ने बताया कि चैतन्य बघेल को धन शोधन रोधी कानून की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया गया, क्योंकि तलाशी के दौरान वह कथित तौर पर सहयोग नहीं कर रहे थे। यह कार्रवाई मामले में नए सबूत मिलने के बाद की गई।
घर के बाहर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात था, वहीं कुछ पार्टी समर्थक भी वहां एकत्रित हो गए थे।
भूपेश बघेल, जो कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं, ने X (पूर्व ट्विटर) पर एक संदेश पोस्ट कर कहा कि विधानसभा सत्र के अंतिम दिन, जब रायगढ़ जिले की तमनार तहसील में अडानी समूह की कोल माइन परियोजना के लिए पेड़ों की कटाई का मुद्दा उठाया जाना था, उसी दिन ईडी उनके घर पहुंच गई।
उनके कार्यालय द्वारा पोस्ट किए गए संदेश में कहा गया, “आज राज्य विधानसभा (मानसून) सत्र का अंतिम दिन है। तमनार में अडानी के लिए पेड़ों की कटाई का मुद्दा (सदन में) उठाया जाना था। साहेब ने ईडी को भिलाई निवास भेज दिया है।”
गौरतलब है कि वरिष्ठ बघेल इसी महीने तमनार तहसील गए थे और कोल माइन परियोजना के लिए पेड़ काटने का विरोध कर रहे स्थानीय ग्रामीणों को अपना समर्थन दिया था।
यह कोल माइन महाराष्ट्र स्टेट पावर जनरेशन कंपनी लिमिटेड (MAHAGENCO) को आवंटित की गई है, जिसने अडानी समूह को MDO (माइन डेवलपर कम ऑपरेटर) के रूप में अनुबंधित किया है।
ईडी ने चैतन्य बघेल के यहां इसी तरह की छापेमारी 10 मार्च को भी की थी।
ईडी ने पहले दावा किया था कि चैतन्य बघेल कथित शराब घोटाले से प्राप्त धन का “प्राप्तकर्ता” हो सकता है। ईडी के अनुसार, इस कथित घोटाले से राज्य के खजाने को भारी नुकसान हुआ और शराब सिंडिकेट से जुड़े लाभार्थियों की जेब में 2,100 करोड़ रुपये से अधिक की रकम गई।
इस मामले में ईडी ने जनवरी में कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री कवासी लखमा के अलावा रायपुर के मेयर और कांग्रेस नेता एजाज ढेबर के बड़े भाई अनवर ढेबर, पूर्व आईएएस अधिकारी अनिल तुतेजा, भारतीय दूरसंचार सेवा (ITS) के अधिकारी अरुणपति त्रिपाठी और अन्य लोगों को भी गिरफ्तार किया था।
ईडी के अनुसार, यह कथित शराब घोटाला वर्ष 2019 से 2022 के बीच उस समय हुआ, जब छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार थी।
अब तक एजेंसी ने इस जांच के तहत विभिन्न आरोपियों की लगभग 205 करोड़ रुपये की संपत्तियाँ अटैच कर दी हैं। वर्ष 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में ईडी की पहली ईसीआईआर (एफआईआर) को रद्द कर दिया था, जो आयकर विभाग की शिकायत के आधार पर दर्ज हुई थी।
बाद में ईडी ने छत्तीसगढ़ ईओडब्ल्यू/एसीबी को नया एफआईआर दर्ज करने को कहा, जो एजेंसी द्वारा दिए गए सबूतों पर आधारित था। इसके बाद ईओडब्ल्यू/एसीबी ने 17 जनवरी को एफआईआर दर्ज की, जो 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस सरकार की हार के एक महीने बाद दर्ज की गई। इसमें पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा, पूर्व मुख्य सचिव विवेक ढांड समेत 70 व्यक्तियों और कंपनियों के नाम शामिल हैं।
ईडी का कहना है कि अवैध शराब बिक्री से मिली कमीशन की रकम राज्य के “उच्चतम राजनीतिक पदाधिकारियों के निर्देशों के अनुसार” वितरित की गई थी।
(ज्यादातर इनपुट दि टेलीग्राफ से लिए गए हैं।)